Friday, 2 June 2017

14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे,  8 करोड़ किसानों को कार्ड वितरित

         सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम किसानों के लिए शुरू की गयी एक क्रांतिकारी योजना है जिससे किसानों की खेती और उपज पर काफी फर्क पड़ रहा है।

     
  इससे फसल की  उत्पादकता में वृद्धि हो रही है और खेती की लागत कम हो रही है। इस स्कीम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़, राजस्थान में किया गया था। सॉयल हेल्थ कार्ड मिट्टी के पोषक तत्वों की स्थिति एवं और मिट्टी की उर्वरकता में सुधार के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की सिफारिश की जानकारी किसानों को प्रदान करता है। इससे किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती है। इसके बाद किसान उसी अनुसार खेत में उर्वरक और अन्य रसायन डालता है। 

           इससे लागत में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम के पहले 2 वर्षीय चक्र (2015-17) में अभी तक 2.53 करोड़ लक्षित नमून एकत्र किए जा चुके  हैं एवं 93ऽ नमूने परीक्षित किए जा चुके हैं। राज्य सरकारों द्वारा लगभग 14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं जिसमें 31 मई तक 8 करोड़ किसानों को कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। अगले तीन माह में शेष सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। देश में अब तक सॉयल हेल्थ कार्ड के इस्तेमाल से काफी अच्छे परिणाम आए हैं।
16 राज्यों के 136 जिलों के किसानों से आई प्रतिक्रिया तथ्य दर्शाती है। नाइट्रोजन उर्वरकों के उपयोग में कमी आयी है और फॉस्फोरस पोटाश और सूक्ष्मपोषक तत्वों के उपयोग में बढ़ोतरी हुई है। 

          धान में 16ऽ से 25ऽ, दालों और तिलहनों में 10ऽ से 15ऽ खेती की लागत में कमी की सूचना मिली है। धान में 10ऽ से 22ऽ, गेहूं और ज्वार में 10ऽ से 15ऽ, दालों में 10ऽ से 30ऽ और तिलहन में 35ऽ से 66ऽ की उत्पादन वृद्धि दर्ज की गयी है।

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