भारतीय टीकाकरण नियामकीय प्रणाली
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डब्ल्यूएचओ एनआरए ग्लोबल बेंचमार्किंग टूल (जीबीटी) के तहत बेंचमार्किंग के लिए भारतीय टीकाकरण नियामकीय प्रणाली की स्थिति का आकलन पूरा कर लिया है। प्रणाली की परिपक्वता की माप कर ली है।
यह आकलन डब्ल्यूएचओ की एक टीम द्वारा किया गया है। जिसमें डब्ल्यूएचओ मुख्यालय जिनेवा के विभिन्न क्षेत्रों, डब्ल्यूएचओ इंडिया कंट्री ऑफिस के विशेषज्ञ, अमेरिका, इटली, जर्मनी, नीदरलैंड, इंडोनेशिया, थाईलैंड एवं मिस्र के विनियामकों से संबंधित विशेषज्ञ शामिल हैं। यह आकलन 9 विभिन्न कार्य क्षमताओं के संबंध में किया गया है। भारतीय एनआरए को 4 अर्थात 5 कार्यों के संबंध में दी गई वर्तमान परिभाषाओं के अनुरुप अंक दिए गए हैं। एवं 4 कार्यों के संबंध में 3 परिपक्वता स्तर के साथ ‘कार्यशील’ घोषित किया गया है। जहां 4 का परिपक्वता स्तर अच्छे परिणामों और सतत बेहतर रुझानों का संकेत देता है, वहीं 3 का परिपक्वता स्तर प्रणालीगत प्रक्रिया आधारित दृष्टिकोण, प्रणालीगत बेहतरी के प्रारंभिक चरण लक्ष्यों के अनुरूप डाटा उपलब्धता एवं बेहतरी के रूझानों के अस्तित्व को परिलक्षित करता है।
भारत का विश्व के फार्मास्यूटिकल उद्योग में अग्रणी स्थान है। फार्मास्यूटिकल उद्योग में पारंपरिक तथा टीका, चिकित्सा उपकरणों एवं पारंपरिक दवाओं समेत जीव विज्ञानी चिकित्सकीय उत्पाद शामिल हैं। एक बड़े टीका उत्पादक देश के रूप में भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसियों (यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ एवं पीएएचओ) को कई प्रकार के टीकों की आपूर्ति कर रहा है।
एक पूर्ण रूप से कार्यशील एनआरए टीकों के डब्ल्यूएचओ पूर्व आहर्ता के लिए एक पूर्व शर्त है। योग्य बने रहने तथा पूर्व आहर्ता दर्जे को बनाए रखने की आवश्यकताओं में से एक डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रकाशित एनआरए संकेतकों पर कार्यशील के रूप में आकलित राष्ट्रीय नियामकीय प्राधिकरण की उपस्थिति है।

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