भारत छोड़ो व आजाद हिन्द फौज की 75 वीं वर्षगांठ
संस्कृति व पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने भारत छोड़ो व आजाद हिन्द फौज की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत, जनपथ, नई दिल्ली में भारत छोड़ो और आजाद हिन्द फौज 75 वीं वर्षगांठ (1942-2017) प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर संबोधन में डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन भारत के स्वाधीनता संग्राम का महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसने समूचे राष्ट्र को ब्रिटेन के शासन से मुक्ति पाने के लिए संकल्पबद्ध कर दिया। लाखों भारतीय गांधी जी के आह्वान और ‘करो या मरो’ के नारे को सुनकर उठ खड़े हुए। गांधी जी और स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख नेताओं को 9 अगस्त, 1942 को गिरफ्तार कर लिया गया।
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 30 जुलाई, 2017 को अपने ‘मन की बात’ में कहा, हमारी युवा पीढ़ी को इस बात की अवश्य जानकारी होनी चाहिए कि 9 अगस्त, 1942 को क्या हुआ था। यह प्रदर्शनी उसी दिशा में हमारा एक प्रयास भर है। यह प्रदर्शनी 01 सितम्बर, 2017 तक जारी रहेगी। यह प्रदर्शनी सार्वजनिक रिकॉर्ड, निजी पत्रों, फोटोग्राफ, समाचारपत्रों की रिपोर्टों और ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित किये गये साहित्य पर आधारित है, जो स्वाधीनता संग्राम के अंतिम चरण के दौरान सामने आया।
इस प्रदर्शनी में कुछ मौलिक पत्रों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी में बड़े पैमाने पर डिजिटल सामग्री है, जिस तक इंटरैक्टिव मोड के जरिये पहुंच बनाई जा सकती है। ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ को पारित करने, ‘स्वाधीनता संग्राम से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी’, आईएनए और सुभाष चंद्र बोस की भूमिका को प्रदर्शित करने वाली फिल्म भी प्रदर्शित की गई है।
इस प्रदर्शनी में चार खंड हैं यथा, भारत छोड़ो आंदोलन का आरंभ, वास्तविक आंदोलन, आंदोलन का प्रभाव, इंडियन नेशनल आर्मी और आजाद हिन्द फौज। भारत छोड़ो आंदोलन का आरंभ, इस खंड में भारत में क्रिप्स मिशन का आगमन और उसकी नाकामी, गांधी जी द्वारा मिशन को ‘पोस्ट–डेटेड चैक’ के रूप में प्रस्तुत करने संबंधी विवरण को दर्शाने वाले दस्तावेज-रिपोर्ट प्रदर्शित किये गये हैं।
इस खंड में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का 14 जुलाई 1942 का वर्धा का प्रस्ताव और मुम्बई में 08 अगस्त, 1942 को उसको स्वीकार किये जाने से संबंधित दस्तावेज भी प्रदर्शित किये गये हैं।

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