ऑस्ट्रेलिया में 60 हजार से अधिक भारतीय छात्र
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मेलकम टर्नबुल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री का भारत में स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया के साथ निरंतर बढ़ रहे सहयोग को बहुत महत्व देता है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय संबंध बहुमुखी हो गए हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इनमें महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। बहुपक्षीय मंचों में हमारा उपयोगी सहयोग दोनों देशों के बीच बढ़ रही आपसी समझ और नजदीकी सहयोग को दर्शाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह संतोषजनक बात है कि हमारे लोग आतंकवाद की चुनौती के बारे में नियमित रूप से बातचीत करते हैं। भारत अपनी इस स्थिति पर मजबूत बना हुआ है कि अतकंवाद को किसी भी परिस्थिति में न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है। सभी प्रकार के रूपों और अभिव्यक्तियों में दुनिया के सभी हिस्सों के शांतिप्रिय देशों द्वारा तत्काल और व्यापक कार्रवाई द्वारा आतंकवाद को समाप्त करने की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत दीर्घकालीन निवेश के लिए एक आकर्षक विकल्प हो सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ कांफ्रेंस और इनवेस्ट इन इंडिया कांफ्रेंस कार्यक्रमों को आर्थिक सहयोग और निवेश बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और जीवाश्म ईंधन बचाने के अपने प्रयासों के रूप में अपनी कुल ऊर्जा मिश्रण योजना के परमाणु ऊर्जा घटक को आगे बढ़ाने का इच्छुक है। भारत इस प्रक्रिया में ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की आपूर्ति को एक महत्वपूर्ण भूमिका में देख रहा है।
भारत इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया के प्रयासों की सराहना करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में 60 हजार से भी अधिक भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने की व्यापक संभावनाएं हैं। हमारे संस्थागत ढांचे में इस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को अधिक व्यापक बनाने की भी संभावनाएं हैं।

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