Tuesday, 25 July 2017

राजमार्ग क्षेत्र के लिए सात लाख करोड़ निवेश की आवश्‍यकता

     सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आकलन किया है कि देश में अगले पांच सालों के दौरान राष्‍ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए लगभग 6.92 लाख करोड़ रुपये की आवश्‍यकता होगी। 

   यह आवश्‍यकता मंत्रालय के कुल बजटीय समर्थन, केन्‍द्रीय सड़क निधि, चुंगी, टीओटी प्रणाली द्वारा राष्‍ट्रीय राजमार्गों से होने वाली आय, भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से लिये गये कर्ज और निजी क्षेत्र के निवेश के जरिए पूरी की जाएगी। 
     यह सूचना कल राज्‍यसभा में सड़क यातायात एवं राजमार्ग तथा नौवहन राज्‍य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ए‍क लिखित उत्‍तर में दी। 
        उन्‍होंने बताया कि सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर 208 रेलवे क्रॉसिंगों को चिन्हित किया है, जहां सेतु भारतम योजना के तहत आरओबी का निर्माण किया जाएगा। अब तक 87 आरओबी परियोजनाओं का अध्‍ययन किया जा चुका है।
           मंडाविया ने यह भी सूचना दी कि सरकार ने देश में मौजूद 1.15 लाख किलोमीटर राष्‍ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को बढ़ाकर दो लाख किलोमीटर तक कर दिया है। एक अलग लिखित उत्‍तर में मनसुख मंडाविया ने सदन को सूचित किया कि सरकार राष्‍ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में प्‍लास्टिक कचरे के इस्‍तेमाल को बढ़ावा दे रही है। यह काम खासतौर से उन शहरी क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिनकी आबादी पांच लाख या उससे अधिक है। 
    इसे 50 किलोमीटर के दायरे में लागू किया जाएगा। बहरहाल, इस समय किसी राष्‍ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में प्‍लास्टिक कचरे का इस्‍तेमाल नहीं किया जा रहा है।  

   

विश्व में भारत के दृष्टिकोण का महत्त्व

       भारत के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के अवसर पर रामनाथ कोविन्द ने कहा कि आज पूरे विश्व में भारत के दृष्टिकोण का महत्त्व है। पूरा विश्व भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं की तरफ आकर्षित है। 

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि विश्व समुदाय अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए हमारी तरफ देख रहा है। चाहे आतंकवाद हो, कालेधन का लेन-देन हो या फिर जलवायु परिवर्तन। वैश्विक परिदृश्य में हमारी जिम्मेदारियां भी वैश्विक हो गई हैं। यही भाव हमें, हमारे वैश्विक परिवार से, विदेश में रहने वाले मित्रों और सहयोगियों से, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में रहकर अपना योगदान दे रहे प्रवासी भारतीयों से जोड़ता है।
          यही भाव हमें दूसरे देशों की सहायता के लिए तत्पर करता है, चाहे वो अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस का विस्तार करना हो, या फिर प्राकृतिक आपदाओं के समय, सबसे पहले सहयोग के लिए आगे आना हो। मुझे, भारत के राष्ट्रपति पद का दायित्व सौंपने के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण कर रहा हूँ। 
        यहाँ सेंट्रल हॉल में आकर मेरी कई पुरानी स्मृतियां ताजा हो गई हैं। मैं संसद का सदस्य रहा हूं, और इसी सेंट्रल हॉल में मैंने आप में से कई लोगों के साथ विचार-विनिमय किया है। कई बार हम सहमत होते थे, कई बार असहमत। लेकिन इसके बावजूद हम सभी ने एक दूसरे के विचारों का सम्मान करना सीखा। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। 
          राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पला-बढ़ा हूँ। मेरी यात्रा बहुत लंबी रही है, लेकिन ये यात्रा अकेले सिर्फ मेरी नहीं रही है। हमारे देश और हमारे समाज की भी यही गाथा रही है। हर चुनौती के बावजूद, हमारे देश में, संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल मंत्र का पालन किया जाता है और मैं इस मूल मंत्र का सदैव पालन करता रहूँगा। 
         राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं इस महान राष्ट्र के 125 करोड़ नागरिकों को नमन करता हूँ और उन्होंने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का मैं वचन देता हूं। मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि मैं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और मेरे पूर्ववर्ती श्री प्रणब मुखर्जी, जिन्हें हम स्नेह से ‘प्रणब दा’ कहते हैं, जैसी विभूतियों के पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूँ।
            राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता, महात्मा गांधी के नेतृत्व में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों का परिणाम थी। बाद में, सरदार पटेल ने हमारे देश का एकीकरण किया। हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हम सभी में मानवीय गरिमा और गणतांत्रिक मूल्यों का संचार किया। वे इस बात से संतुष्ट नहीं थे कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही काफी है।
         राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि उनके लिए, हमारे करोड़ों लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता के लक्ष्य को पाना भी बहुत महत्त्वपूर्ण था। अब स्वतंत्रता मिले 70 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। हम 21वीं सदी के दूसरे दशक में हैं, वो सदी, जिसके बारे में हम सभी को भरोसा है कि ये भारत की सदी होगी, भारत की उपलब्धियां ही इस सदी की दिशा और स्वरूप तय करेंगी।
       हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक नेतृत्व देने के साथ ही नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करे। हमारे लिए ये दोनों मापदंड कभी अलग नहीं हो सकते। ये दोनों जुड़े हुए हैं और इन्हें हमेशा जुड़े ही रहना होगा। देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है। विविधता ही हमारा वो आधार है, जो हमें अद्वितीय बनाता है। इस देश में हमें राज्यों और क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन-शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। हम बहुत अलग हैं, लेकिन फिर भी एक हैं और एकजुट हैं। 
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि 21वीं सदी का भारत, ऐसा भारत होगा जो हमारे पुरातन मूल्यों के अनुरूप होने के साथ ही साथ चौथी औद्योगिक क्रांति को विस्तार देगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि इसमें ना कोई विरोधाभास है और ना ही किसी तरह के विकल्प का प्रश्न उठता है। हमें अपनी परंपरा और प्रौद्योगिकी, प्राचीन भारत के ज्ञान और समकालीन भारत के विज्ञान को साथ लेकर चलना है।
          राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि एक तरफ जहां ग्राम पंचायत स्तर पर सामुदायिक भावना से विचार-विमर्श करके समस्याओं का निस्तारण होगा, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल राष्ट्र हमें विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचने में सहायता करेगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि ये हमारे राष्ट्रीय प्रयासों के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं। राष्ट्र निर्माण अकेले सरकारों द्वारा नहीं किया जाता। सरकार सहायक हो सकती है, वो समाज की उद्यमी और रचनात्मक प्रवृत्तियों को दिशा दिखा सकती है, प्रेरक बन सकती है।
           राष्ट्र निर्माण का आधार है राष्ट्रीय गौरव: हमें गर्व है भारत की मिट्टी और पानी पर; हमें गर्व है भारत की विविधता, सर्वधर्म समभाव और समावेशी विचारधारा पर; हमें गर्व है भारत की संस्कृति, परंपरा एवं अध्यात्म पर; हमें गर्व है देश के प्रत्येक नागरिक पर; हमें गर्व है अपने कर्त्तव्यों के निवर्हन पर, और हमें गर्व है हर छोटे से छोटे काम पर, जो हम प्रतिदिन करते हैं। 
         देश का हर नागरिक राष्ट्र निर्माता है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति भारतीय परंपराओं और मूल्यों का संरक्षक है और यही विरासत हम आने वाली पीढ़ियों को देकर जाएंगे। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले और हमें सुरक्षित रखने वाले सशस्त्र बल, राष्ट्र निर्माता हैं। जो पुलिस और अर्धसैनिक बल, आतंकवाद और अपराधों से लड़ रहे हैं, वो राष्ट्र निर्माता हैं। जो किसान तपती धूप में देश के लोगों के लिए अन्न उपजा रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है। 
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि और हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए, कि खेत में कितनी बड़ी संख्या में महिलाएं भी काम करती हैं। जो वैज्ञानिक 24 घंटे अथक परिश्रम कर रहा है, भारतीय अंतरिक्ष मिशन को मंगल तक ले जा रहा है, या किसी वैक्सीन का अविष्कार कर रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है। जो नर्स या डॉक्टर सुदूर किसी गांव में, किसी मरीज की गंभीर बीमारी से लड़ने में उसकी मदद कर रहे हैं, वो राष्ट्र निर्माता हैं। 
       जिस नौजवान ने अपना स्टार्ट-अप शुरू किया है और अब स्वयं रोजगार दाता बन गया है, वो राष्ट्र निर्माता है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि ये स्टार्ट-अप कुछ भी हो सकता है। किसी छोटे से खेत में आम से अचार बनाने का काम हो, कारीगरों के किसी गांव में कार्पेट बुनने का काम हो या फिर कोई लैबोरेटरी, जिसे बड़ी स्क्रीनों से रौशन किया गया हो। वो आदिवासी और सामान्य नागरिक, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में हमारे पर्यावरण, हमारे वनों, हमारे वन्य जीवन की रक्षा कर रहे हैं और वे लोग जो नवीकरणीय ऊर्जा के महत्त्व को बढ़ावा दे रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं।
         राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि वो प्रतिबद्ध लोकसेवक जो पूरी निष्ठा के साथ अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं, कहीं पानी से भरी सड़क पर ट्रैफिक को नियंत्रित कर रहे हैं, कहीं किसी कमरे में बैठकर फाइलों पर काम कर रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि वो शिक्षक, जो नि:स्वार्थ भाव से युवाओं को दिशा दे रहे हैं, उनका भविष्य तय कर रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं। वो अनगिनत महिलाएं जो घर पर और बाहर, तमाम दायित्व निभाने के साथ ही अपने परिवार की देख-रेख कर रही हैं, अपने बच्चों को देश का आदर्श नागरिक बना रही हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं।
          राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि नागरिक ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, उन प्रतिनिधियों में अपनी आस्था और उम्मीद जताते हैं। नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए यही जनप्रतिनिधि अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में लगाते हैं। लेकिन हमारे ये प्रयास सिर्फ हमारे लिए ही नहीं हैं। सदियों से भारत ने वसुधैव कुटुंबकम, यानि पूरा विश्व एक परिवार है, के दर्शन पर भरोसा किया है। ये उचित होगा कि अब भगवान बुद्ध की ये धरती, शांति की स्थापना और पर्यावरण का संतुलन बनाने में विश्व का नेतृत्व करे। 
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि एक राष्ट्र के तौर पर हमने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन इससे भी और अधिक करने का प्रयास, और बेहतर करने का प्रयास, और तेजी से करने का प्रयास, निरंतर होते रहना चाहिए। ये इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2022 में देश अपनी स्वतंत्रता के 75वें साल का पर्व मना रहा होगा। हमें इस बात का लगातार ध्यान रखना होगा कि हमारे प्रयास से समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े उस व्यक्ति के लिए, और गरीब परिवार की उस आखिरी बेटी के लिए भी नई संभावनाओं और नए अवसरों के द्वार खुलें।  
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हमारे प्रयत्न आखिरी गांव के आखिरी घर तक पहुंचने चाहिए। इसमें न्याय प्रणाली के हर स्तर पर, तेजी के साथ, कम खर्च पर न्याय दिलाने वाली व्यवस्था को भी शामिल किया जाना चाहिए। देश के नागरिक ही हमारी ऊर्जा का मूल स्रोत हैं। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि राष्ट्र की सेवा के लिए, मुझे इन लोगों से इसी प्रकार निरंतर शक्ति मिलती रहेगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि एक ऐसा समाज जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीन दयाल उपाध्याय जी ने की थी। ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। ये हमारे सपनों का भारत होगा। एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा। ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा।

Monday, 24 July 2017

जेएनयू में बराक होस्टल की आधारशिला

      पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अन्तरिक्ष राज्य मंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय परिसर में बराक होस्टल की आधारशिला रखी। 

       इस अवसर पर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आज के इस समारोह की प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी। उन्होनें कहा कि जेएनयू में 8000 से ज्यादा विद्यार्थी है। इसमें से अधिकतर विद्यार्थी पूर्वोत्तर क्षेत्र के है। उन्होने बताया कि पिछले वर्ष बंगलौर विश्वविद्यालय में भी पूर्वोत्तर की छात्राओं के लिए छात्रावास की आधारशिला रखी गई थी।
      डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार का ध्यान शेष देश को पूर्वोत्तर भारत के निकट लाने पर है। उन्होने कहा कि पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र मंत्रालय ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवा स्टार्ट अप और उद्यमियों के लिए ‘उद्यम पूंजी कोष’ बनाया है।
     उन्होनें कहा कि यह कार्यक्रम पूर्वोत्तर क्षेत्र को मिलने वाले सभी प्रोत्साहनों के अतिरिक्त है। उन्होनें पूर्वोत्तर क्षेत्र की साक्षरता दर पर बल देते हुए कहा कि केरल के बाद सबसे अधिक साक्षरता दर मिजोरम में है। इस अवसर पर डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, राजनीति और संस्कृति पर ‘फिस्सिटी एण्ड फ्लूइडिटी’ नामक एक पुस्तक का विमोचन किया। 
        पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा ने कहा कि जेएनयू अपनी साख के कारण विद्यार्थीयों के लिए संतोष का श्रोत है। जेएनयू में छात्रावास कि समस्या रही है और छात्रावास की आधारशिला इस कमी को पूरा करने के लिए रखी जा रही है। 
     उन्होने छात्रावास के शीघ्र बन जाने की आशा व्यक्त की। पूर्वोत्तर परिषद के सचिव राम मुविया ने कहा कि बराक होस्टल बनाने के काम में 100 प्रतिशत धन यानी 28.30 करोड़ रुपयें पूर्वोत्तर परिषद दे रही है। यह छात्रावास तीन वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगा और इस में चार सौ विद्यार्थी रहेगें। 200 छात्र और 200 छात्राओं के लिए यह होस्टल है।

पंजाब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वाधीनता आंदोलन का केन्द्र था

      उप राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने कहा कि पंजाब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वाधीनता आंदोलन का केन्द्र था। 

      अंसारी यहां डॉ. सुखचैन कौर बस्सी द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस इन पंजाब’ का विमोचन करने के बाद एकत्र जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के दमन की शिकार भारत की जनता की इच्छाओं और आकांशाओं के साथ खड़े होने के लिए उनकी नुमाइंदगी की। हमारे राजनैतिक परिदृश्य में महात्मा गांधी के आगमन के साथ ही, आंदोलन विशिष्ट वर्ग के अभियान से एक सच्चे जन आंदोलन में तबदील हो गया।
         उप राष्ट्रपति ने कहा कि पंजाब अविभाजित पंजाब में कांग्रेस का पहला वार्षिक सम्मेलन दादा भाई नौरोजी की अध्य़क्षता में 1893 में लाहौर में हुआ था। कांग्रेस और संगठन की तेजी से बढ़ती हुई गतिविधियां पंजाब से राजनैतिक नेताओं और स्वाधीनता सेनानियों की ऊर्जा और प्रयासों के रूप में हमारी आजादी के आंदोलन में पंजाब की जनता की सक्रिय भागीदारी की गवाह हैं।

    

यौन उत्‍पीड़न की शिकायत के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक बॉक्‍स

       केंद्रीय महिला और बाल विकास श्रीमती मेनका संजय गांधी ने नई दिल्‍ली में कार्य स्‍थल पर यौन उत्‍पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज करने के लिए यौन उत्‍पीड़न इलेक्‍ट्रॉनिक बॉक्‍स एक ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन व्‍यवस्‍था का आरंभ किया। 

     यह शिकायत प्रबंधन व्‍यवस्‍था कार्य स्‍थल पर महिलाओं का यौन उत्‍पीड़न (निवारण, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का प्रभावी कार्यान्‍वयन सुनिश्चित करने के लिए विकसित की गई है। यह पोर्टल केंद्र सरकार के किसी भी कार्यालय में काम करने वाली या वहां जाने वाली महिलाओं को उक्‍त अधिनियम के अंतर्गत कार्य स्‍थल पर यौन उत्‍पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज करने का मंच उपलब्‍ध कराने की दिशा में की गई एक पहल है।
        श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि हालांकि फिलहाल यह सुविधा केंद्र सरकार के कर्मचारियों को उपलब्‍ध कराई जा रही है। लेकिन जल्‍द ही इस पोर्टल के दायरे में निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा। महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि कार्य स्‍थल पर महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न का परिमाण उपलब्‍ध कराने वाले कुछ सर्वेक्षण कराये गए हैं।
         हालांकि, महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न से संबंधित समस्‍या के आकार का आकलन करने और उसे समझने के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय यह सर्वेक्षण राष्‍ट्रीय स्‍तर पर करायेगा। भारत सरकार देश की सबसे बड़ी नियोक्‍ता है, जो अपने विविध कार्यों को अंजाम देने के लिए 30.87 लाख लोगों को नियुक्त करती है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की गणना 2011 के अनुसार महिलाएं केंद्र सरकार के नियमित कर्मचारियों की कुल संख्‍या 3.37 लाख है।

नई हज नीति-2018 जल्द, उद्देश्य हज की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना

       देश की सलामती, सुरक्षा और समृद्धि की दुआओं के साथ सुबह केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हज 2017 के लिए 300 हज यात्रियों के पहले जत्थे को इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के हज टर्मिनल से रवाना किया। 

    नकवी ने हज यात्रियों को शुभकामनाएं दी। नकवी ने कहा कि इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय ने हज कमिटी ऑफ़ इंडिया एवं अन्य सम्बंधित एजेंसियों के साथ मिल कर हज 2017 की तैयारियां समय से बहुत पहले ही पूरी कर ली थी ताकि हज यात्रा को सरल-सुगम बनाया जा सके। 
          नकवी ने कहा कि नई हज नीति - 2018 जल्द ही तैयार कर ली जाएगी और अगले साल से हज इस नई हज पालिसी के अनुसार आयोजित किया जायेगा। नकवी ने कहा कि हज नीति 2018 तय करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही सौंप देगी। नई हज पालिसी का उद्देश्य हज की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है।
         इस नई पालिसी में हज यात्रियों के लिए विभिन्न सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जायेगा। समुद्री मार्ग से भी हज यात्रा को दोबारा शुरू करना भी इस नई हज पालिसी में शामिल है। हज यात्रियों के मुंबई से समुद्री मार्ग के जरिये जेद्दा जाने का सिलसिला 1995 में रुक गया था। हज यात्रियों को जहाज (समुद्री मार्ग) से भेजने पर यात्रा संबंधी खर्च करीब आधा हो जाएगा। 
      नई तकनीक एवं सुविधाओं से युक्त पानी का जहाज एक समय में चार से पांच हजार लोगों को ले जाने में सक्षम हैं। मुंबई और जेद्दा के बीच 2,300 नॉटिकल मील की एक ओर की दूरी सिर्फ दो-तीन दिनों में पूरी कर सकते हैं। जबकि पहले पुराने जहाज से 12 से 15 दिन लगते थे। हज 2017 के लिए सऊदी अरब द्वारा कोटे में की गई बड़ी वृद्धि के बाद हज कमेटी ऑफ इंडिया के माध्यम से 1,25,025 हाजी हज यात्रा पर जायेंगे।
         जबकि 45,000 हज यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हज पर जायेंगे। इस वर्ष भारत में 21 केंद्रों से कुल 1,70,025 हज यात्री भारत से हज यात्रा पर जायेंगे। इस वर्ष भारत में 21 केंद्रों से 1 लाख 70 हजार से ज्यादा हज यात्री हज पर जा रहे हैं। दिल्ली से 1628 हज यात्री हज पर जायेंगे। 
        इसके अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से हाजियों को मिलकर दिल्ली से 16,600 हज यात्री हज पर जा रहे हैं। नई दिल्ली के अलावा गोवा, गुवाहाटी, लखनऊ, मंगलौर, वाराणसी से भी हज यात्री सऊदी अरब जा रहे हैं। 
           25 जुलाई को श्रीनगर और कोलकाता से, 27 जुलाई को गया से, 8 अगस्त को रांची, कोलकाता, भोपाल और बैंगलोर से, 10 अगस्त को नागपुर से, 13 अगस्त को अहमदाबाद, औरंगाबाद, चेन्नई, कोचीन, जयपुर, 14 अगस्त को इंदौर और हैदराबाद से हज यात्री रवाना होंगे।
           21 हज यात्रा केंद्रों में दिल्ली, गोवा, गौहाटी, लखनऊ, मंगलौर, वाराणसी, श्रीनगर, कोलकाता, गया, रांची, भोपाल, बैंगलोर, मुंबई, नागपुर, अहमदाबाद, औरंगाबाद, चेन्नई, कोचीन, जयपुर, इंदौर, हैदराबाद शामिल हैं। 
       अहमदाबाद से 10958, कोचीन से 11657, लखनऊ से 12380, मुंबई से 5605, औरंगाबाद से 2729, बैंगलोर से 4641, चेन्नई से 3370, गौहाटी से 4483, हैदराबाद से 6273, जयपुर से 4777, कोलकाता से 10348, लखनऊ से 12380, मुंबई से 5605, नागपुर से 2187, रांची से 3159 हाजी हज यात्रा पर जा रहे हैं।

Sunday, 23 July 2017

राष्‍ट्रपति के लिए विदाई भोज का आयोजन

          सेना प्रमुखों की समिति ने राष्‍ट्रपति और सशस्‍त्र सेनाओं के सर्वोच्‍च कमांडर के सम्‍मान में विदाई भोज का आयोजन किया।

    इस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, रक्षा राज्‍य मंत्री, सेना प्रमुख, सेना के वरिष्‍ठ अधिकारी और सेवाओं तथा रक्षा मंत्रालय के सिवीलियन अधिकारी भी मौजूद थे। सादा किन्‍तु विशिष्‍ट समारोह का आयोजन मानेकशा सेंटर में किया गया।
      सशस्‍त्र सेनाओं के सुप्रीम कमांडर राष्‍ट्रपति ने सेना के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ बातचीत में हिस्‍सा लिया। सेना प्रमुखों की समिति के अध्‍यक्ष एवं सेना अध्‍यक्ष ने राष्‍ट्रपति को धन्‍यवाद दिया और कहा कि राष्‍ट्रपति सशस्‍त्र सेनाओं के सभी कर्मियों के लिए प्ररेणा स्रोत रहे हैं। 
       राष्‍ट्रपति ने अपने विदाई भाषण में कहा कि उनकी शुभकामनाएं सशस्‍त्र सेना के सदस्‍यों एवं उनके परिवारों के साथ है। उन्‍होंने राष्‍ट्र के लिए अपनी जान न्‍यौछावर करने वाले शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की।